एक समय के बाद में हमारे ऊपर अपने घर की जिम्मेदारी आ जाती है। हमें अपने घर की जिम्मेदारी उठानी भी पड़ती है। यह जिम्मेदारी हमे समय से पहले ही बड़ा बना देती है। अगर आपके के भी ऊपर घर की जिम्मेदारी है तो आपको इस पोस्ट में Ghar ki jimmedari shayari जरूर से पढ़नी चाहिए। यह सब शायरियां आपको मेहनत करने के लिए प्रेरित करेगी। घर की जिम्मेदारीयां इंसान को मजबूत बना देती है।
आपके कंधों पर भी आपके घर की जिम्मेदारी है तो आपको इस पोस्ट में हमारी टीम द्वारा लिखी गई लगभग 188 से भी ज्यादा घर की जिम्मेदारी पर शायरी पढ़ने के लिए मिल जाएगी। आप इस पोस्ट से एक अच्छी सी घर की जिम्मेदार की शायरी को चुनकर अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर भी लगा सकती हो। आप चाहो तो इसे अपने फेसबुक प्रोफाइल पर भी शेयर कर सकते हो।
घर की जिम्मेदारी पर शायरी

मजबूरियाँ देर रात तक जगाती है
साहेब और
जिम्मेदारियां सुबह जल्दी उठाती हे।
सपनों को मार कर जीवन की सच्चाई अपनानी पड़ी 😞
ज़िम्मेदारी ने नींद तक चुरानी पड़ी 🌙
छोटी उम्र में भी अपने ही पैरों पर खड़े हो जाते हैं,
ज़िम्मेदारियाँ हों सर पे तो बच्चे जल्द ही बड़े हो जाते हैं।

किसी के भी कंधों पर घर की
जिम्मेदारी जब आती है
तो बचपन की वो मासूमियत कहीं पर खो जाती है !!
बड़ी नादान मुझे मेरी नादानियाँ लगती हैं
ना जाने क्यों बोझ घर की जिम्मेदारियाँ लगती हैं !!
घर की जरूरतों ने हमें जीना सिखा दिया
जिम्मेदारियों ने हर सपना भुला दिया !!

अपने दर्द छुपाकर जो मुस्कुराते हैं
वही जिम्मेदार लोग कहलाते हैं !!
जिम्मेदारियों के सफर में हम बहुत थक तो जाते हैं
मगर अपनों की खातिर फिर संभल जाते हैं !!
बहाने बनाना बद करो दो
जिम्मेदारी लेना शुरू करो।

जब सिर पर घर की जिम्मेदारी का बोझ आता है
तब ही एक इंसान अपने घर का असली मर्द कहलाता है !!
त्याग जीवन को खूबसूरत बनाता है,
और जिम्मेदारी घर को संभालकर रखती है।
परिवार की मुस्कान में ही उसकी खुशी बसती है,
जिम्मेदारी निभाने में ही उसकी
पूरी दुनिया बसती है।

जो अपनों की खातिर अपनी नींद भी कुर्बान कर देता है,
वही परिवार का सच्चा
सहारा बन जाता है।
जिम्मेदारी को केवल बोझ मत समझना,
यह परिवार का
सबसे बड़ा भरोसा भी होती है।
जिम्मेदारियां निभाते-निभाते उम्र गुजर जाती है
और लोग कहते हैं कि जिंदगी आसान होती है !!

उम्र से नहीं, जिम्मेदारियों से बड़ा हुआ हूं मैं
हालात ने जो सिखाया,
वही सीखा हूं मैं !!
Ghar ki jimmedari shayari
घर के उजाले का ज़िम्मा है मुझपर..
अब डगमगाने लगे चराग़, तो जलना पड़ रहा है मुझे….
ये जो जिम्मेदारियां हैं
ना बड़ी बद्तमीज़ हैं,
ख़्वाहिशों को कैसे
समझौतों में बदल देती हैं….

घर की जिम्मेदारी निभाना इबादत जैसा काम है,
क्योंकि इसमें अपनों के लिए सच्चा प्यार होता है।
जिम्मेदारी निभाने वालों को लोग कभी भूलते नहीं,
उनकी इज्जत हर रिश्ते और
हर जगह होती है।
ज़िन्दगी ने बहुत कौशीशें की मुझे रुलाने की,
मगर ऊपर वाले ने जिम्मेदारी
उठा रखी है मुझे हँसाने की….

दिल कहता है मर जाऊँ तेरी जुदाई में,
पर जिम्मेदारियों ने मेरे
हाथ जकड़ रखे हैं….
Ghar ki jimmedari shayari on life
काम होता तो कब का ही ख़त्म हो चुका होता,
ये तो जिम्मेदारी ही है, जो हमेशा ही बढ़ती ही जा रही है….
समंदर से ख़ामोश रहकर उठाता हूँ जिम्मेदारी,
वरना शहर डुबोने का
सलीका तो हम भी जानते हैं….

चाहतें सबकी हैं पर वक्त नहीं है अब किसी के भी पास ⏳
ज़िम्मेदारी ने बांध रखे हैं सारे साँस 🫁
छोटी उम्र में बड़ा हो जाता है,
जब घर का सहारा वही बन जाता है।
कंधों पर बोझ है, मगर शिकायत नहीं
जिम्मेदारियां हैं, कोई सजा नहीं !!

मैं खो नहीं सकता चाहे भीड कितनी भारी है
पहुंचना हैं मंजिल पर क्योंकि सर पर जिम्मेदारी है !!
घर की जिम्मेदारियां इंसान को
वक्त से पहले बड़ा बना देती हैं
मुस्कुराते चेहरे के पीछे कई दर्द छुपा देती हैं !!
इक उम्र ख्वाहिशों के
लिए भी नसीब हो,
ये वाली तो बस…. जिम्मेदारियों में ही गुज़र गई….
कुछ इसलिए भी
ख्वाईशो को मार देता हूँ
माँ कहती है घर की जिम्मेदारी है
तुझ पर।
Ghar ki jimmedari shayari 2 line hindi
परिवार की जिम्मेदारी निभाते-निभाते ये जाना
अपनों की खुशी से बढ़कर इस जीवन में नहीं कोई खजाना !!
परिवार के लिए जो इंशान हर एक मुश्किल से लड़ जाता है
वही असली जिम्मेदार इंसान कहलाता है !!
बेटा कमाए या बेटी कमाए,
घर की जिम्मेदारी सभी मिलकर निभाएं।
इंसान की असली परिपक्वता तब दिखाई देती है,
जब वह परिवार की जिम्मेदारी उठाता है।
हर कदम पर जिम्मेदारी परीक्षा लेती है,
मगर हर परीक्षा
इंसान को मजबूत बना देती है।
जो अपने लिए कम
और अपनों के लिए ज्यादा जीता है,
वही परिवार के लिए किसी फरिश्ते से कम नहीं होता।
जिम्मेदारियां हर दिन जिंदगी का नया सबक सिखाती हैं,
और संघर्षों के बीच
इंसान को मजबूत बनाती हैं।
Ghar ki jimmedari shayari hindi
जब से सिर पर पारिवारिक ज़िम्मेदारी आई
मस्ती कम, समझदारी ज़्यादा नज़र आई !!
जिम्मेदारियों का बोझ भारी जरूर होता है
मगर परिवार का प्यार उसे हल्का कर देता है !!
मोहब्बत करने वाले हज़ार मिल जायेंगे,
मानेंगे तब जब आप जिम्मेदारी निभाएंगे।
क्या बेचकर हम खरेदें तुझे ऐं ज़िन्दगी,
सब कुछ तो हमारा गिरवी पड़ा है जिम्मेदारी के बाज़ार में
जो अपनी जिम्मेदारियां और फर्ज़ निभाता है
वो इंसान नहीं,
मिसाल बन जाता है !!
जिम्मेदारियों का बोझ पीठ पर पसीना दे जाएगा,
दिल तुम्हारा कभी यू मचलेगा Jab बारिश में भीगने को….
घर की जरूरतों ने हमें पहले से ज्यादा समझदार बना दिया
जिम्मेदारियों ने वक्त से पहले बड़ा बना दिया !!
जिम्मेदारियां निभाते-निभाते ये हुनर आ गया
दर्द कितना भी हो, पर मुस्कान आ गया !!
Jimmedari Par Shayari on Life
कंधा झुका हुआ है मेरा, लेकिन मेरी उम्र बड़ी नहीं है..
आज समझ में आया,
जिम्मेदारी से बड़ा कोई बोझ नहीं है….
अक्सर लोगों में तभी समझदारी आती है
जब कन्धों पर घर की सभी जिम्मेदारी आती है !!
जब से सिर पर घर की ज़िम्मेदारी आई
मस्ती कम, समझदारी ज़्यादा नज़र आई !!
ज़िम्मेदारी का बोझ नहीं, ये तो सम्मान है
घर संभालना हर बेटे-बेटी का अभिमान है !!
कुछ इस लिए भी ख़्वाहिशों को मार देता हूँ,
माँ कहती है- घर की जिम्मेदारी है तुझपर….
थक कर रुक जाऊँ, ऐसा इरादा नहीं। 🙂
फ़र्ज़ से पीछे हटना, मुझे गवारा नहीं। 🚶♂️
जिम्मेदारियां के आगे कई बार
सपने हार जाते है।
जिम्मेदारी हर इंसान को बदल देती है,
मासूमियत छीनकर मजबूत बना देती है।
अपने सपनों को छोड़ देता है,
जो घर का सहारा बन जाता है।
घर की जिम्मेदारी शायरी 2 Line
आज के समय में सभी लोग 2 लाइन शायरी के दीवाने है और ज्यादातर लोगों को 2 लाइन शायरी पढ़ने का शौक भी है। उन्हें पढ़ कर समझना बहुत आसान होता है। इस पोस्ट में हमने घर की जिम्मेदारी शायरी 2 लाइन भी शामिल करी है। यह घर की जिम्मेदारी पर लिखी गई 2 लाइन शायरी आपको बहुत ज्यादा पसंद आएगी।
जिम्मेदारी की कीमत बड़ी होती है,
ये हर रिश्ते को गहरी जोड़ती है।
त्याग से ही घर संभलता है,
जिम्मेदारी से ही प्यार पलता है।
घर के हर कोने में जब हमे मेहनत दिखती है,
जिम्मेदारी की पहचान वहीं मिलती है।
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